➤ टांडा में हर साल करीब 6 लाख मरीजों का इलाज और 40 हजार ऑपरेशन का दावा
➤ कैथ लैब में अब तक करीब 30 हजार प्रोसीजर, 2016 से बढ़े कार्डियोलॉजिस्ट 3 से 6
➤ ओपन हार्ट सर्जरी के 100 से ज्यादा प्रोसीजर और 29 किडनी ट्रांसप्लांट
कांगड़ा। टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज की सुविधाओं और हाल के वर्षों में शुरू हुई चिकित्सा सेवाओं को लेकर एचपीटीडीसी के चेयरमैन एवं नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली ने विशेष प्रेसवार्ता में कई महत्वपूर्ण आंकड़े और उपलब्धियां सामने रखीं। उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज में हर साल करीब 6 लाख मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि करीब 40 हजार मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। प्रेसवार्ता में कार्डियक सेवाओं, कैथ लैब, ओपन हार्ट सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल सीटों में बढ़ोतरी को प्रमुखता से रखा गया। बाली ने कहा कि इन उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि अस्पताल में हो रहे बड़े स्तर के काम की जानकारी प्रदेश की जनता को मिल सके।
आरएस बाली ने टांडा मेडिकल कॉलेज के विस्तार की चर्चा करते हुए कहा कि कॉलेज में हर साल करीब 6 लाख मरीज उपचार के लिए आते हैं। उन्होंने इसे हिमाचल के बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक बताते हुए कहा कि इतने बड़े मरीज भार के बावजूद डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों की टीम लगातार सेवाएं दे रही है। उन्होंने कॉलेज की स्थापना और विकास में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह तथा पूर्व मंत्री जीएस बाली के योगदान का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यदि सिर्फ 10 वर्षों के मरीजों का आंकड़ा लिया जाए तो करीब 60 लाख मरीज टांडा में इलाज करा चुके होंगे। बाली ने इसी आधार पर टांडा मेडिकल कॉलेज पर पड़ने वाले भारी मरीज भार को सामने रखा और कहा कि इतने बड़े संस्थान को लगातार मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने नर्सिंग शिक्षा के विस्तार का भी उल्लेख किया और बताया कि पहले जहां नर्सिंग स्कूल में सीमित सीटें थीं, वहीं अब इसे नर्सिंग कॉलेज के रूप में आगे बढ़ाया गया है।
नर्सिंग स्कूल से कॉलेज तक, सीटें बढ़ाने का दावा
प्रेसवार्ता में आरएस बाली ने बताया कि टांडा में नर्सिंग स्कूल 2009 में स्थापित हुआ था और बाद में इसे नर्सिंग कॉलेज में बदला गया। उनके अनुसार पहले यहां 30 सीटें थीं, जिन्हें बढ़ाकर पहले 60 और फिर 100 सीटें किया गया। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों की पढ़ाई को देखते हुए इससे एक समय में करीब 300 विद्यार्थी प्रशिक्षण ले सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि टांडा में बीएससी एमएलटी, ओटी टेक्नीशियन और रेडियोलॉजी जैसे पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ाई गई हैं। प्रेसवार्ता में रेडियोथेरेपी से जुड़े नए विद्यार्थियों और पैरामेडिकल शिक्षा के विस्तार का भी उल्लेख किया गया। बाली के अनुसार इन विस्तारों के कारण आने वाले वर्षों में करीब 1000 विद्यार्थियों के एक साथ यहां पढ़ने की स्थिति बनेगी। उन्होंने इसे नगरोटा बगवां क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जोड़ते हुए कहा कि बाहर से आने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों के कारण क्षेत्र में आवास, भोजन, परिवहन और अन्य स्थानीय गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा।
हर साल 40 हजार ऑपरेशन, 6 लाख मरीजों का इलाज
आरएस बाली ने प्रेसवार्ता में टांडा मेडिकल कॉलेज के उपचार भार का आंकड़ा सामने रखते हुए कहा कि करीब 6 लाख मरीज हर साल यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें लगभग 40 हजार मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। उन्होंने पिछले 10 वर्षों में करीब 4 लाख और 20 वर्षों में करीब 8 लाख ऑपरेशन होने का अनुमान भी प्रेसवार्ता में रखा।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर इलाज होने के बावजूद अस्पताल की उपलब्धियों और डॉक्टरों की विशेषज्ञ सेवाओं की जानकारी आम लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचती। इसी वजह से उन्होंने डॉक्टरों और विभागों से अपनी-अपनी चिकित्सा उपलब्धियों तथा सफल मामलों की जानकारी नियमित रूप से साझा करने की अपील की।
कैथ लैब में करीब 30 हजार प्रोसीजर का दावा
प्रेसवार्ता का एक प्रमुख मुद्दा टांडा मेडिकल कॉलेज की कैथ लैब रहा। बाली ने बताया कि यह कैथ लैब 29 अक्टूबर 2016 को शुरू हुई थी। उनके अनुसार पिछले करीब 10 वर्षों में इसमें लगभग 30 हजार प्रोसीजर किए जा चुके हैं। डॉक्टरों ने बताया कि यहां हर महीने लगभग 300 से 400 एंजियोग्राफी होती हैं और 100 से अधिक मरीजों में स्टेंटिंग जैसे प्रोसीजर किए जाते हैं।
प्रेसवार्ता में डॉक्टरों की ओर से यह भी बताया गया कि कैथ लैब में एंजियोग्राफी के अलावा हृदय रोग से जुड़े कई अन्य प्रोसीजर किए जाते हैं। बच्चों में हृदय से जुड़े कुछ प्रोसीजर और अन्य उन्नत इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया। इनमें उत्तर भारत में पहली बार किए गए कुछ प्रोसीजर का दावा भी प्रेसवार्ता के दौरान सामने रखा गया।
बाली ने कहा कि कैथ लैब शुरू होने के समय कार्डियोलॉजिस्ट की संख्या कम थी। उनके अनुसार बाद में यह संख्या बढ़ाकर छह डॉक्टर की गई। उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में एक कार्डियोलॉजिस्ट बढ़ाए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा समय में कार्डियोलॉजी विभाग को और मजबूत किया गया है।
ओपन हार्ट सर्जरी का सपना हुआ पूरा
प्रेसवार्ता में ओपन हार्ट सर्जरी को भी टांडा मेडिकल कॉलेज की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पेश किया गया। बाली ने बताया कि कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी यानी CTVS सेवा शुरू की गई और सितंबर 2023 में ओपन हार्ट सर्जरी का पहला चरण शुरू हुआ। उन्होंने इसे पहले देखे गए एक लक्ष्य को पूरा करने के रूप में बताया।
डॉक्टरों ने बताया कि ओपन हार्ट सर्जरी सामान्य प्रक्रिया से काफी अलग और जटिल होती है। इसके लिए ऑपरेशन थिएटर, हार्ट-लंग मशीन, प्रशिक्षित स्टाफ, एनेस्थीसिया टीम और अन्य व्यवस्थाओं की जरूरत होती है। प्रेसवार्ता में बताया गया कि टांडा में पहले से मौजूद मशीनों और अन्य संसाधनों को तैयार कर प्रक्रिया शुरू की गई।
बाली के अनुसार सितंबर 2023 में ओपन हार्ट सर्जरी शुरू होने के बाद 100 से अधिक प्रोसीजर किए जा चुके हैं। इनमें वाल्व रिप्लेसमेंट और ऐसे मरीजों की सर्जरी शामिल है, जिनका इलाज केवल स्टेंट के जरिए संभव नहीं होता।
किडनी ट्रांसप्लांट और डायलिसिस सेवाओं पर भी जोर
प्रेसवार्ता में किडनी ट्रांसप्लांट को दूसरी बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने रखा गया। बाली ने बताया कि टांडा में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की गई है और अब तक 29 ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि आगे ब्रेन डेड मरीजों से अंगदान के जरिए ट्रांसप्लांट की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
इसके साथ ही डायलिसिस से जुड़े एक प्रोसीजर का भी उल्लेख किया गया। डॉक्टरों के अनुसार जुलाई 2024 से अब तक करीब 2500 प्रोसीजर किए जा चुके हैं। प्रेसवार्ता में बताया गया कि निजी अस्पतालों में जिस प्रोसीजर की लागत करीब 40 से 45 हजार रुपये तक बताई गई, वह टांडा में करीब 800 रुपये में हो जाता है।
कैथ लैब खराब होने पर बोले- दूसरी लैब भी लाई जा रही
कैथ लैब के खराब होने के मुद्दे पर बाली ने कहा कि मशीन 2 अक्तूबर से खराब है। उन्होंने बताया कि यह मशीन विकास पुरुष जीएस बाली के समय में लगी थी और इसका उद्घाटन 29 अक्तूबर 2016 को हुआ था। उस समय प्रदेश में आईजीएमसी शिमला के बाद यह दूसरी कैथ लैब थी। उनके अनुसार मशीन करीब नौ करोड़ रुपये की है और इसके पार्ट विदेश से, खासकर सिंगापुर से, मंगवाने पड़ते हैं। कस्टम ड्यूटी समेत प्रक्रिया में आम तौर पर तीन से चार हफ्ते लग जाते हैं। कई बार पार्ट खराब निकलने पर दोबारा भेजना पड़ा और डेढ़ महीने तक का समय भी लगा है।
बाली ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि पहले भी मशीन कई बार बंद रही है, कभी दो दिन, कभी चार, छह या दस दिन के लिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमा से बात हुई है। मुख्यमंत्री ने कैथ लैब को ठीक कराने के साथ एक नई कैथ लैब लाने का भरोसा भी दिया है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि टांडा में नई थ्री टेस्ला एमआरआई भी स्थापित हो रही है और छह नई लिफ्टें लगाई गई हैं।
हर सप्ताह बताई जाएंगी टांडा की ‘सक्सेस स्टोरी’
आरएस बाली ने प्रेसवार्ता के दौरान एक और पहल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब टांडा मेडिकल कॉलेज में हर सप्ताह प्रेस कॉन्फ्रेंस या बुलेटिन के माध्यम से सफल उपचार और चिकित्सा उपलब्धियों की जानकारी साझा की जानी चाहिए। उनका कहना था कि डॉक्टर और विशेषज्ञ अपने-अपने विभाग में किए जा रहे महत्वपूर्ण उपचार और सफल प्रक्रियाओं के बारे में लोगों को जानकारी दें।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में कमियां होने पर उन्हें सामने लाना जरूरी है, लेकिन साथ ही बड़ी संख्या में सफल उपचार और मरीजों को मिल रही सेवाओं की जानकारी भी जनता तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने अस्पताल में आने वाले करीब 6 लाख मरीजों के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि कुछ मामलों में परेशानी या कमी हो सकती है, लेकिन पूरे संस्थान की सेवाओं का आकलन केवल ऐसे मामलों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
बाली ने नकारात्मक राजनीति से बचने की अपील करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज को बेहतर तरीके से काम करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज या परिवार को शिकायत हो तो वह अस्पताल प्रशासन और प्रिंसिपल के सामने अपनी बात रखे, लेकिन चिकित्सा संस्थान की उपलब्धियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीजों और उनके परिवारों से जुड़ी दुखद घटनाओं को लेकर गलत या अधूरी जानकारी सामने आ जाती है। प्रेसवार्ता में उन्होंने ऐसी खबरों को लेकर सावधानी बरतने की अपील की और कहा कि किसी घटना के वास्तविक तथ्यों की पुष्टि किए बिना उसे आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
आरएस बाली ने कहा कि उनका उद्देश्य टांडा मेडिकल कॉलेज की उपलब्धियों को सार्वजनिक करना है, ताकि लोगों को पता चले कि यहां किस स्तर पर उपचार और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग की टीम की मेहनत का उल्लेख करते हुए कहा कि 6 लाख मरीजों का सालाना इलाज, हजारों ऑपरेशन, कैथ लैब में हजारों प्रोसीजर, ओपन हार्ट सर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी सेवाओं को जनता तक पहुंचाना जरूरी है।



